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Poetry In Urdu -1: Parveen Shakir Shayari ka best collection

Poetry In Urdu : दोस्तों, परवीन शाकिर साहिबा के शायरियां पूरी दुनिया में मशहूर है. उन्हें अपनी लिखावट करने के लिए किसी अलग विचार की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है. क्योंकि वह खुद की लिखावट को कुछ इस तरह से ढाल लेती है.

ऐसे लगता है कि उन्होंने उस परिस्थिति को देखते हुए ही इस शायरी को लिखा हो. और तभी उस शायरी का नजरिया हमें ठीक से याद आता है. और जिस तरह से उनके उर्दू पोएट्री का लहजा है. हमें इस बात का पूरी तरह से यकीन हो सकता है.

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परवीन शाकिर जी की इन उर्दू पोएट्री को Vanshika Navlani इन की आवाज में सुनकर आपका दिल दहल जाएगा!

उनकी लिखावट के दुनिया में कई सारे कायल है. और उनकी इन्हीं Parveen Shakir Shayari की बदौलत वे अपनी जिंदगी में आशिक का इंतजार करते हैं. और अपने रूठे आशिक को मनाने का प्रयास करते हैं. हम भी आपके इन्हीं जज्बातों को समझते हुए Poetry In Urdu लेकर आए हैं. और हमें यकीन है कि Shayari Sukun का यह प्रयास आपको तहे दिल से पसंद आएगा.

Poetry In Urdu Love

1)

क़ैद में गुज़रेगी जो उम्र बड़े काम की थी
पर मैं क्या करती के ज़ंजीर तेरे नाम की थी..

जिस के माथे पे मेरे बख्त* का तारा चमका
चाँद के डूबने की बात उसी शाम की थी…

*बख्त : तकदीर

kaid mein gujregi jo Umra Bade Kaam Ki Thi
per mein kya karti Ke janjeer Tere Naam Ki Thi..
Jiske Mathe pe mere bakht Ka Tara chamka
Chand Ke doobne Ki Baat Usi Shaam Ki Thi..

अपने प्यार की जिंदगी को भला कौन कैद की सलाखों के अंदर गुजारना चाहेगा? लेकिन इस बात पर प्रेमिका अपने यार को दोषी मानती है. और इसी वजह से उस प्रेमी का गुजारा अपने आशिक के हाथों ही हो सकता है.

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उसे पता है कि उसके माथे की बिंदिया जिस तरह से चमकती है. शायद चांद भी उस बिंदिया का ही दीवाना है. और उसका चमकना भी उसी से सीखा है. चांद को अपने डूबने का इंतजार होता है. लेकिन आपके जिंदगी की शाम न जाने कब से ही हो चुकी है.

2)

बाद मुद्दत उसे देखा…लोगो
वो ज़रा भी नहीं बदला…लोगो

खुश न था मुझ से बिछड़ कर वो भी
उस के चेहरे पे लिखा था…लोगो…

baad Muddat use Dekha logon
vah Jara bhi nahin Badla logon..
Khush Na Tha Mujhse bichhad Kar vah Bhi
Uske Chehre per likha tha logon..

Poetry In Urdu Love की मदद से आशिक अपनी प्यार को कई सारी मुद्दतों के बाद देखता है. तो उसके मन में अपने यार के लिए बदला हुआ मंजर नजर आता है. लेकिन इस बात को वह जानता है. जब उसकी नींद भी रातों में टूट जाती है.

और वह अपने आंसुओं को बहाने लगता है. तब उसके चेहरे पर वह गम की घटा साफ साफ दिखाई देती है. किसी को उसके दिल का आलम बताने की कोई जरूरत नहीं होती है. इसी वजह से परवीन शाकिर साहिबा अपनी शायरी की मदद से उस शायर को समझाना चाहती है. उसका वह झूठा प्यार भी अब छुप नहीं सकता है.

Poetry In Urdu Best

3)

अपनी रुसवाई…तेरे नाम का चर्चा देखूँ
एक ज़रा शेर कहूँ और मैं क्या-क्या देखूँ..

शाम भी हो गई…धुँधला गई आँखें भी मेरी
भूलने वाले मैं कब तक तेरा रस्ता देखूँ..

apni ruswai Tere Naam Ka Charcha Dekhun
Ek Jara sher kahun aur mein kya kya Dekhun..
Sham Bhi Ho Gai.. dhundhla Gai Aankhen Bhi Meri
bhulne wale Mai Kab Tak Tera Rasta Dekhun..

जिस बात की वह महबूबा अपने मोहब्बत में राह देखती है. उसे उसके नाम के साथ अपने यार का नाम जुड़ा हुआ पड़ती है. और मन ही मन वह मुस्कुराती रहती है. लेकिन इस बात के लिए वह और किसी को क्या-क्या कहेगी.

Poetry In Urdu Best
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क्योंकि अब उसकी आंखें भी अपने यार का इंतजार करते हुए मध्यम सी हो गई है. लेकिन फिर भी अब तक उसके दिलबर की कोई भी निशानी है उसे दूर तक नजर नहीं आई है. और उसकी नजरें उसके रास्ते से जरा भी दूर हटने के लिए तैयार नहीं है.

4)

जुस्तजू खोये हुओं की उम्र भर करते रहे
चाँद के हमराह हम हर शब सफ़र करते रहे..

वो न आएगा हमें मालूम था उस शाम भी
इंतज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे..

justuju Khoye Hua ki Umra Bhar karte rahe
Chand Ke Hamra ham har shab Safar Karte rahe..
vah na aaega Hamen Maloom tha use Shaam bhi
Intezar uska Magar Kuchh sochkar Karte rahe..

Poetry In Urdu Best से जब यार अपनी प्यार की उम्र का पता करना चाहता है. उसे अपनी जिंदगी भी कम लगने लगती है. क्योंकि कई बार उसने देखा और परखा होता है. किसी इंसान की जिंदगी कम पड़ जाती है.

लेकिन उसका प्यार कभी भी अधूरा नहीं होता है. और उसे उसकी मोहब्बत को पूरा करने के लिए शायद अगला भी जन्म लेना पड़े तो वह तैयार होता है. लेकिन जिस तरह से आसमान में चमकता हुआ चांद भी रात भर अकेला सफर करता है. कुछ उसी तरह से आ गई दिल टूटे हुए आशिक को अपना सफर तय करना पड़ेगा.

Poetry In Urdu Text

5)

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी..

मेरी तलब था एक शख़्स वो जो नहीं मिला तो फिर
हाथ दुआ से यूँ गिरा भूल गया सवाल भी..

Kuchh To Hawa bhi sard thi kuch tha Tera Khayal bhi
Dil Ko Khushi ke sath sath Hota Raha malal bhi..
Meri Talab tha Ek shaks vah Jo Nahin Mila To fir
Hath dua se yu Gira bhul gaya Sawal bhi..

हवाओं में अपने महबूब की बिखरी हुई खुशबू महसूस करना आसान होता है. क्योंकि कोई भी आशिक अपने यार का इतना दीवाना होता है. उसे वह दूर से ही बस उसकी महक से भी पहचान सकता है.

यही उसके प्यार की दीवानगी की हद होती है. लेकिन जब वही आशिक अपने दिलबर को छोड़ चला जाता है. उसके मन में हमेशा के लिए कई सारे सवालों को अधूरा ही छोड़ चला जाता है. और तब वह अपने यार के लिए दुआएं भी नहीं कर सकता है.

6)

मुश्किल है अब शहर में निकले कोई घर से
दस्तार* पे बात आ गई है होती हुई सर से..

इस बार जो इंधन के लिये कट के गिरा है
चिड़ियों को बड़ा प्यार था उस बूढ़े शजर* से..

*दस्तार : पगड़ी
*शजर : tree

Mushkil Hai Ab Shahar Mein nikale Koi Ghar Se
Dastaar pe Baat aa gai hai hoti Hui sar se..
is bar Jo indhan ke liye kat ke Gira hai
Chidiya ko Bada pyar tha us budhe shajar se..

Poetry In Urdu Text की मदद से अपने यार की याद किसी आशिक को आती है. तो वह अपने दिल का आलम खुद ही बदलने की कोशिश करता है. लेकिन इस तरह की मुश्किल हो उसे हर पल याद आ रही है. और वह अपने प्यार की तुलना उन शहर के लोगों से करना चाहता है.

जहां के लोग आप कहीं भी अपने घरों को छोड़कर चले जाने के लिए चाहते तो है. लेकिन वे कभी भी वहां से जा नहीं पाते हैं. कुछ उसी तरह जैसे किसी इंसान की सिर की पगड़ी वह निकाल नहीं सकता. और इससे भी बदतर हालत तब होती है. जब किसी चिड़िया का घोंसला उस पेड़ पर होता है. जो पेड़ अभी-अभी कट चुका है.

Poetry In Urdu 2 Lines About Life

7)

वो तो ख़ुशबू है हवाओं में बिखर जाएगा
मसला फूल का है फूल किधर जाएगा..

हम तो समझे थे के एक ज़ख़्म है भर जाएगा
क्या ख़बर थी के रग-ए-जाँ में उतर जाएगा..

vah to Khushbu Hai Hawaon Mein bikhar Jayega
masla Phool ka hai ful Kidhar Jaega..
Ham to Samjhe The ki ek jakhm aahe Bhar jaega
kya khabar Thi Ke rag-ae-Jaan Mein Utar jaega..

अपने आशिक ने दिए दर्द को जब प्रेमी समझ नहीं पाता है. उसे यह किसी हवा का झोंका ही लगता है. जैसे वह खुशबू की तरह यहां वहां बिखर जाता है. जिस तरह से फूल से खुशबू तो उड़ जाती है.

लेकिन फुल उसी जगह पर रहता है. उसी तरह से उसके दिल का जख्मों से भरता हुआ नजर आता है. लेकिन उसका दिल वही पर रहता है. और वह दिल अपने यार के लिए किसी भी जख्मों को कभी भूलने के लिए तैयार नहीं होता है.

8)

वो कैसी…कहाँ की ज़िन्दगी थी
जो तेरे बगैर कट रही थी

सहरा* की तरह थीं ख़ुश्क* आँखें
बारिश कहीं दिल में हो रही थी

*सहरा : desert
*खुश्क : dry

vah Kaisi.. kahan ki Jindagi thi
Jo Tere bagair Kat rahi thi..
Sahra Ki Tarah Thi khushk Aankhen
Barish kahin dil mein ho rahi thi..

Poetry In Urdu 2 Lines About Life को सुनकर अपना प्यार याद आयेगा. जैसे प्रेमी अपने दिलबर के छोड़ चले जाने से अंदर ही अंदर टूट रहा है. इसी वजह से वह अपने दिलबर के बिना अकेले जिंदगी कैसे जी रहा है.

इस बात का उसे खुद भी पता नहीं है. लेकिन उसके जिंदगी को कोई भी सहारा बाकी नहीं है. और उसका मन भी उसे पूरी तरह से खाए जा रहा है. उसके मन का कुछ इस तरह से हाल हो रहा है. जैसे एक तरफ कोई बारिश हो रही होती है. तो दूसरी तरफ पूरी तरह से माहौल रुखा सुखा होता है.

Poetry In Urdu

9)

तुझ से तो कोई गिला नहीं है
क़िस्मत में मेरी सिला नहीं है..

जीने की तो आरज़ू ही कब थी
मरने का भी हौसला नहीं है..

Tujhse to Koi Gila Nahin Hai
Kismat Mein Meri Sila Nahin Hai..
Jeene Ki to Aarzoo hi kab Thi
Marne Ka Bhi Hosla Nahin Hai..

प्रेमी अपने प्यार का किसी से शिकवा भी नहीं कर सकता है. क्योंकि वह उसे अपने दिल के पास मानता था. और आज वही इंसान उसके दिल को तोड़ कर उसे अकेला छोड़ चला गया है.

Poetry In Urdu
Poetry In Urdu

लेकिन इस बात का दोस्त वह प्रेमी अपने नसीब को ही देना चाहता है. ताकि उसकी जिंदगी का कलंक उसकी मौत के साथ ही मिट सकेगा. लेकिन इस तरह से अधूरी जिंदगी के बाद उसके मन में मौत का ख्याल भी तो नहीं आ रहा है. क्योंकि उसे अब किसी बात का कोई हौसला ही नहीं रहा है.

10)

तेरा घर और मेरा जंगल भीगता है साथ-साथ
ऐसी बरसातें के बादल भीगता है साथ-साथ..

बचपने का साथ, फिर एक से दोनों के दुख
रात का और मेरा आँचल भीगता है साथ-साथ..

Tera Ghar aur mera Jungle bhigta Hai
Aisi barsate ke Badal bhigta Hai Saath Saath..
Bachpan Ka Sath FIR Ek Se donon Ke Dukh
raat ka aur mera Aanchal bhigta Hai sath sath..

Poetry In Urdu कुछ बातें हम कभी इसे कह नहीं पाते हैं. और इन्हीं बातों को परवीन जी अपनी उर्दू पोएट्री की मदद से बताना चाहती है. उनके दिल में जो दर्द है उसे वे भीगती बारिश की तरह मानती है.

जिस तरह से किसी का घर जंगल में हो. तो वह एक साथ भीगता है. कुछ उसी तरह से किसी प्रेमी के बचपन का प्यार भी उसे अगर ना मिला. तो भी वह उसे याद करते हुए एक साथ भीगने की बात करता है.

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3 Comments

  1. वाह!! एक और बढिया पेशकश..
    बेहतरीन शायरियां चुनी है आप ने.. और उस के साथ खूबसुरत सी script.. वंशिका जी आपकी आवाज में इन शायरीयोंको सून कर दिल खुश हो गया..
    शुभेच्छा,
    कल्याणी

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