Shayari Sukun Presents

Shayari by  Allama Iqbal Sir

by shayarisukun.com

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दिल की बस्ती अजीब बस्ती है, लूटने वाले को तरसती है. मुमकिन है कि तू जिसको समझता है बहारां औरों की निगाहों में वो मौसम हो खिजां का shayarisukun.com

मुलाकातें नहीं मुमकिन हमें अहेसास है लेकिन.. तुम्हे हम याद करते है बस इतना याद रखना तुम… shayarisukun.com

तेरी दुआ से कज़ा तो बदल नहीं सकती मगर है, इस से यह मुमकिन की तू बदल जाये तेरी दुआ है, की हो तेरी आरज़ू पूरी मेरी दुआ है तेरी आरज़ू बदल जाये

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जानते हो तुम भी फिर भी अजनान बनते हो इस तरह हमें परेशान करते हो पूछते हो तुम्हे किया पसंद है जवाब खुद हो फिर भी सवाल करते हो

बात सझ्दों कि नहीं खुलूस दिल कि होती है इकबाल हर मयखाने में सराबी और हर मस्जिद में कोई नमाजी नहीं होता shayarisukun.com

तेरे इश्क़ की इन्तहा चाहता हूँ मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी बड़ा बे-अदब हूँ सज़ा चाहता हूँ shayarisukun.com

हम वक़्त गुज़ारने वाले नहीं रौनक महेफिल में ज़िन्दगी भर याद करोगे के ज़िन्दगी में आया था कोई shayarisukun.com

इक़रार .ऐ.मुहब्बत ऐहदे.ऐ.वफ़ा सब झूठी सच्ची बातें हैं इक़बाल. हर शख्स खुदी की मस्ती में बस अपने खातिर जीता है shayarisukun.com

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