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Allama Iqbal Shayari

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अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे Listen to this shayari on shayarisukun.com

अनोखी वज़्अ' है सारे ज़माने से निराले हैं ये आशिक़ कौन सी बस्ती के या-रब रहने वाले हैं ज़रूरी तो नहीं मोहब्बत लफ्ज़ुं में बयाँ हो किया सच मेरी आँखें तुम्हे कुछ नही कहेती…

जानते हो तुम भी फिर भी अजनान बनते हो इस तरह हमें परेशान करते हो.. पूछते हो तुम्हे किया पसंद है जवाब खुद हो फिर भी सवाल करते हो.. Listen this Shayari on Website

माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख न पूछो मुझ से लज़्ज़त ख़ानमाँ-बर्बाद रहने की नशेमन सैकड़ों मैं ने बना कर फूँक डाले हैं

शाखों से टूट जाए वह पत्ते नहीं हैं हम. आंधियों से कोई कह दो, अपनी औकात में रहे..! उरूज-ए-आदम-ए-ख़ाकी से अंजुम सहमे जाते हैं कि ये टूटा हुआ तारा मह-ए-कामिल न बन जाए

पानी पानी कर गयी मुझको कलंदर की वो बात तू झुका जो ग़ैर के आगे न तन तेरा न मन तेरा Follow us on Spotify

हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा अपने मन में डूब कर पा जा सुराग़-ए-ज़ि़ंदगी तू अगर मेरा नहीं बनता न बन अपना तो बन

मत तरसा इतना किसी को अपनी मोहब्बत के लिए.. किया पता तेरी महोब्बत पाने के लिए जी रहा हो कोई.. Motivational Allama Iqbal Shayari in Hindi

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