Poetry In Urdu Love -2: Nida Fazli Popular Shayari Writings

Poetry In Urdu Love : दोस्तों, कहीं शायरियों का मुशायरा हो. और वहां पर निदा फ़ाज़ली साहब की कोई ग़ज़ल ना गाई जाए ऐसा हो ही नहीं सकता है! क्योंकि उनके लिखावट की पहचान ही कुछ ऐसी है. जिसके तमाम दुनिया के लोग दीवाने हैं. फिर चाहे भारत हो, पाकिस्तान हो या अन्य कोई देश हो.

कई मुल्कों में उनकी शायरियां एवं गजलें बहोत ज्यादा सुनी एवं पढ़ी जाती है. उनकी ऐसी कई गजलें एवं नज़्म हैं. जिन पर फिल्मों में गाने भी बने हैं. और वे गजलें जैसे अमर हो गई है. इसी वजह से ऐसी प्रख्यात गजलें एवं नज्म लिखने की लिए फाजली साहब को 2013 में भारत सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा है. हम आज उन्हीं में से कुछ गजलें एवं गानों का यहां पर जिक्र करना चाहते हैं.

आपने बहुत ही प्रख्यात फिल्म में ‘होशवालों को खबर क्या…’ यह गाना जरूर सुना होगा. यह निदा फ़ाज़ली साहब की ही देन है. और साथ ही ‘आ भी जा, ऐ सुबह आ भी जा’, ‘तू इस तरह से मेरी जिंदगी में शामिल है’ ऐसी कई नज्म भी लिखी है.

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निदा फ़ाज़ली साहब की इन शायरियों को Avalokita Pandey इनकी आवाज में सुनकर उनकी लिखावट को तहे दिल से सराहोगे!

हम भी आज उनकी कुछ ऐसी ही Nida Fazli Shayari आपके लिए लेकर आए हैं. जिन्हें Shayari Sukun के मंच पर पेश करते हुए हमें बहुत ज्यादा आनंद आ रहा है. और साथ ही इन Poetry In Urdu Love को पेश करके हम निदा फ़ाज़ली साहब को आदरांजली देना चाहते हैं. तो चलिए दोस्तों, अब बिना वक्त गवाये निदा फ़ाज़ली साहब की पेशकश सुने!

Poetry In Urdu Text

1)

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीं तो कहीं आसमाँ नहीं मिलता..

तेरे जहान में ऐसा नहीं के प्यार न हो
जहाँ उम्मीद हो इस की वहाँ नहीं मिलता..

Kabhi Kisi Ko Mukammal Jahan Nahi Milta
Kahin Zameen to Kahin Aasman Nahin Milta..
Tere Jahan Mein Aisa Nahin Ki Pyar Na Ho
Jahan ummid Ho iski vahan Nahin Milta…

कई बार हम अपने जिंदगी में सिर्फ सफर ही करते जाते हैं. लेकिन हमें अपनी जिंदगी में मंजिल का कोई ठिकाना नहीं मिलता है. और इसी वजह से हम अपने मुकम्मल जहां को भी नहीं बना पाते हैं. और कई बार मुसाफिरों को ना कोई आसमान अपना लगता है.

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और ना ही कोई जमीन उन्हें अपनी होती है. वह बस अपने जिंदगी का सफर ही करते जाते हैं. उन्हें इस बात का पता होता है. इस दुनिया में प्यार की कोई कमी नहीं होती है. लेकिन जहां पर प्यार को पाने की कोशिश की जाती है. अक्सर वही पर प्यार नहीं मिल पाता है.

2)

किसी भी शहर में जाओ कहीं क़याम करो
कोई फिज़ा कोई मंज़र किसी के नाम करो..

हर एक बस्ती बदलती है रंग रूप कई
जहाँ भी सुबह गुज़ारो उधर ही शाम करो..

Kisi bhi Shahar Mein jao Kahin Qayam karo
Koi Fiza Koi Manjar kisi ke naam karo
Har EK Basti Badalti Hai Rang Roop Kai
Jahan Bhi Subah gujaro Udhar hi Shyam karo..

Poetry In Urdu Text को सुनकर अपने नाम पर कोई मकान करना चाहोगे. क्योंकि निदा फ़ाज़ली साहब खुद इस बात का जिक्र करते हैं कि हमें कुछ नया करना चाहिए. और जिंदगी में कोई ना कोई मकाम अपने नाम जरूर करना चाहिए.

क्योंकि हर कोई अपने मंजिल को अपने नाम करेगा. तभी हम किसी फिजा को अपना कह सकते हैं. और हर किसी शहर में हम अपनी जिंदगी का बसेरा कर सकते हैं. और तभी हमें यह बात जरूर याद रखनी चाहिए. अगर हम किसी ठिकाने पर कुछ देर तक ठहर जाए. तो हमें शाम भी वही गुजारनी चाहिए.

Poetry In Urdu Love

3)

अब खुशी है न कोई ग़म रुलाने वाला
हम ने अपना लिया हर रंग ज़माने वाला..

उस को रुखसत तो किया था मुझे मालूम न था
सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला..

ab Khushi Hai Na Koi Gam rulane wala
Humne Apna liya Har Rang Jamane wala..
usko rukhsat to kiya tha Mujhe Maloom Na Tha
Sara Ghar Le Gaya Ghar Chhod Ke jane wala..

अगर जिंदगी पूरी तरह से जीनी है. तो हमें जिंदगी को हर पहलू से समझना होगा. क्योंकि कई बार हमारे जिंदगी में बहुत से दर्द होते हैं. जी नहीं हम खुद ही अपना लेते हैं. लेकिन दुनिया के हर रंग को समझते हुए अगर उसे अपना लिया जाए.

Poetry In Urdu Love
Poetry In Urdu Love

तो जमाने में हम अपने नजरिए को कायम रख सकते हैं. और दुनिया को समझने में हमें बहुत आसानी हो सकती है. कुछ इसी तरह से हमारी जिंदगी से कोई अपना चला जाए. और वह हमारी सारी दुनिया को अकेला छोड़ कर चला जाता है.

4)

अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं..

पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है
अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं..

apni Marzi Se Kahan Apne Safar ke hum hain
Rukh Hawaon ka Jidhar ka hai Udhar ke Ham Hain..
pahle Har chij Thi apni Magar ab Lagta Hai
Apne Hi Ghar Mein Kisi dusre Ghar Ke Ham Hain..

Poetry In Urdu Love की मदद से अपनी जिंदगी के सफर को समझना चाहिए. क्योंकि हमें पता है कि हम इस जिंदगी में सब कुछ अपने मर्जी के मुताबिक नहीं कर सकते हैं.

कई ऐसी बातें होती हैं जिन्हें हम ना चाहते हुए भी करते हैं. क्योंकि जिंदगी का उसूल ही कुछ ऐसा होता है. जहां पर हवा बहती है उसी तरफ हम अगर गए. तभी हवा के साथ हम उस राह पर हम चल सकते हैं. लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि हम खुद अपने ही लोगों को पराया समझने लगते हैं.

Poetry In Urdu Best

5)

बदला न अपने आप को जो थे वही रहे
मिलते रहे सभी से मगर अजनबी रहे..

अपनी तरह सभी को किसी की तलाश थी
हम जिस के भी क़रीब रहे दूर ही रहे..

Badla na apne aap ko jo the wahi Rahe
Milte Rahe Sabhi se magar Ajnabi Rahe..
apni Tarah Sabhi Ko Kisi Ki Talash thi
Ham Jiske bhi Kareeb Rahe Dur hi Rahe..

खुद को बदलने की हम चाहे कितनी भी कोशिश कर ले. लेकिन हम खुद की बहन को ज्यादा देर तक बदला हुआ नहीं रख सकते. क्योंकि हमारे जिंदगी में जो चीज कायम होगी. उसी तरह से हमारे दिल का नजरिया भी होगा.

Poetry in Urdu Best
Poetry in Urdu Best

हम इस रंग बदलती दुनिया में अपने और पराए जल्दी पहचान नहीं सकते हैं. लेकिन जिसे भी हम अपना मानते हैं. उन्हें हम अपने दिल के पास ही रखने की जरूर कोशिश करते हैं. क्योंकि यही जीवन जीने की कला होती है. और यह कला हर किसी को सीखना जरूरी होता है.

6)

देखा हुआ सा कुछ है तो सोचा हुआ सा कुछ
हर वक़्त मेरे साथ है उलझा हुआ सा कुछ..

साहिल की गिली रेत पर बच्चों के खेल सा
हर लम्हा मुझ में बनता बिखरता हुआ सा कुछ..

dekha hua Sa Kuch Hai To Socha hua sa Kuchh
Har Waqt Mere Sath Hai Uljha Hua sa Kuchh..
Sahil ki Gili rate per bacchon Ke Khel sa
Har Lamha Mujhme Banta bikharta hua Sa Kuchh..

Poetry In Urdu Best की मदद से अपनी जिंदगी का रुख बदलना चाहोगे. कई बार हमारी जिंदगी में कुछ नजरिया देखने से बनता है. तो कुछ बात सोचने से अलग हो जाती है. लेकिन हम अगर अपनी ही दुनिया में खोए रहे.

तो हमारे लिए जिंदगी जीना भी जैसे मुश्किल हो जाएगा. जिस तरह से समंदर किनारे बच्चे रेत के टीले बनाते हैं. उसी तरह से हमें अपनी जिंदगी को आसान तरीके से देखना चाहिए. कभी हम उन अपनी जिंदगी में ऐसे ही खेल को बनते हुए देखते हैं. तो कभी जिंदगी का खेल ऐसे ही बिखर जाता है.

Poetry In Urdu 2 Lines About Life

7)

दिन सलीक़े से उगा रात ठिकाने से रही
दोस्ती अपनी भी कुछ रोज़ ज़माने से रही..

शहर में सब को कहाँ मिलती है रोने की फ़ुरसत
अपनी इज़्ज़त भी यहाँ हँसने-हँसाने से रही..

Din Salike se uga Raat thikane se Rahi
Dosti Apni Bhi Kuchh Roj Jamane se Rahi
Shahar Mein Sabko kahan milati hai Rone Ki Fursat
apni Ijjat bhi yahan hansne- hansane se Rahi..

अपनी जिंदगी को हमें हर रोज जिस तरह से देखना है. कुछ उसी तरह से अपना नजरिया बन जाता है. क्योंकि दिन भी अपने आप हर रोज की तरह हो जाता है. और रात भी कुछ उसी तरह से ढलती रहती है.

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर कोई अपने जिंदगी से खुश होता है. कई सारे लोगों को जीवन में अपने दिल की दुखड़े बताने का मौका भी नहीं मिलता है. लेकिन कई लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने गम को छुपाते हैं. लेकिन दूसरों के गम को दूर करने की तहे दिल से कोशिश करते हैं. और वह लोग ही सच्ची जिंदगी जी पाते हैं.

8)

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाए तो मिट्टी है… खो जाए तो सोना है..

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है..

duniya Jise Kahate Hain Jadu Ka Khilauna Hai
mil jaaye to Mitti Hai.. Kho Jaaye to Sona Hai
Barsat ka Badal To Deewana Hai Kya Jaane
kis Raah Se Bachana hai kis Chhath ko bhigona hai..

Poetry In Urdu 2 Lines About Life की मदद से जमाने का रंग देखना चाहोगे. जमाने को जादू का खिलौना कहा जाता है. क्योंकि यह हर वक्त कहीं छिप जाता है. तो कहीं मिल जाता है. कहीं पर रंग बदल लेता है.

इसी वजह से जो इसे जीत पाया. वही उसका पूरी तरह से आनंद ले पाता है. लेकिन जो इसे हार जाता है. उसके लिए इसकी कोई भी कीमत नहीं होती है. और यही बात बारिश के बादल की भी होती है. वह किसी रास्ते को जानबूझकर नहीं भिगोता है. या फिर किसी राह को भिगोना छोड़ नहीं देता है.

Poetry In Urdu

9)

होश वालों को ख़बर क्या बेख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िन्दगी क्या चीज़ है..

हम लबों से कह न पाए उन से हाल-ए-दिल कभी
और वो समझे नहीं ये ख़ामोशी क्या चीज़ है..

Hosh Walon Ko Khabar Kya Bekhudi Kya chij Hai
Ishq kije FIR samajhiye Jindagi kya chij hai..
Ham Labo Se Kahe Na Paye Unse HAL ae Dil Kabhi
aur vah samjhe Nahin Ye Khamoshi kya chij hai..

निदा फ़ाज़ली साहब की यह मशहूर ग़ज़ल कईयों के दिलों पर आज भी राज करती है. वे इसमें बताना चाहते हैं कि दुनिया में प्यार करने वाला कभी होश में नहीं रहता है. वह हमेशा अपनी मोहब्बत की नशे में ही घूमता है.

और जो इंसान होश में हो उसे प्यार का कोई इल्म नहीं होगा. अगर आपको बेहोशी का मतलब समझना है. तो एक बार जिंदगी में प्यार जरूर करना होगा. क्योंकि प्यार करने वाला अपने होठों से किसी बात को नहीं कहता है. और तब कई बार वह प्रेमी उसकी चुप्पी को समझ नहीं पाता है.

10)

तन्हा तन्हा हम रो लेंगे महफ़िल महफ़िल गायेंगे
जब तक आँसू पास रहेंगे तब तक गीत सुनायेंगे

तुम जो सोचो वो तुम जानो हम तो अपनी कहते हैं
देर न करना घर जाने में वरना घर खो जायेंगे

Tanha Tanha Hum Ro Lenge mahfil mahfil gaenge
jab tak Aansu pass Rahenge tab tak geet sunenge..
Tum Jo Socho vah Tum Jano Ham to apni Kahate Hain
Der Na karna ghar jaane mein Varna Ghar Kho jaenge..

Poetry In Urdu को सुनकर अपनी महफिल को तन्हा पाओगे. निदा फ़ाज़ली साहब के लिखावट का जादू हमें इस शायरी में दिखता है. वह कहना चाहते हैं कि जो कोई प्रेमी खुद को अकेला महसूस करता है. तो वह हर महफिल में कुछ इसी तरह का व्यवहार करता है.

इसीलिए वह अपने तहे दिल से यही दुआ करता है कि जब तक उसके आंसू है. जब तक उसके दिल में दर्द है. वह उस दर्द को गाकर दिखाना चाहता है. जिस तरीके से और नजरिए से वह दुनिया को देखता है. दुनिया उसी तरह से उसे नजर आती है.

हमारी इन Poetry In Urdu Love -2 को सुनकर अगर आप भी निदा फ़ाज़ली साहब की लिखावट के दीवाने हो गए हो. तो हमें comment box में comment जरूर करें.

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6 thoughts on “Poetry In Urdu Love -2: Nida Fazli Popular Shayari Writings”

  1. वाह वा अवलोकिता मॅम

    बहोत ही गहराई भरी निदा फ़ाज़ली साब की शायरियाँ पेश की आपने..
    बहोत बढ़िया😊👌👌

  2. वाह नायाब शायरीयांन !!
    बहुत बहुत बढिया script !!
    बेहतरीन पेशकश अवलोकीता जी..
    शुभेच्छा,
    कल्याणी

  3. अवलोकिता ,तुमने अपनी खूबसूरत आवाज़ में उर्दू लफ्जो को सुंदर तरीके से सजाया है ।फाजली साब की शायरी की गहराइयों कि जीवंत पेशकश प्रस्तुत करने के लिए बहुत बधाई ।आशीर्वाद 🤚.

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